Friday, February 28, 2025
EU Urged to Address India's Human Rights Crisis During Historic 2025 Commission Visit
Thursday, February 27, 2025
मैग्ना कार्टा, जो की मानवाधिकारों का उद्भव दस्तावेज है
मैग्ना कार्टा, लैटिन में
"महान चार्टर" हिंदी में यह इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण कानूनी
दस्तावेजों में से एक है। यह मूल रूप से 1215 में इंग्लैंड के
राजा जॉन के शासनकाल के दौरान जारी किया गया था और तब से इसने आधुनिक संवैधानिक और
कानूनी प्रणालियों के सिद्धांतों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यहां मैग्नाकार्टा के बारे में विस्तृत जानकारी इस प्रकार है:
ऐतिहासिक संदर्भ:
मैग्ना कार्टा का निर्माण 13वीं शताब्दी की
शुरुआत में इंग्लैंड में राजनीतिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि में किया गया था। किंग
जॉन के शासनकाल को सामंतों और चर्च के साथ संघर्ष, भारी कराधान
(टैक्स) और शाही शक्ति के कथित दुरुपयोग द्वारा चिह्नित किया गया था। उस समय
तत्कालीन अभिजात्यवर्ग/सामंतों के एक समूह
ने राजा के अधिकार को सीमित करने और अपने अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।
निर्माण और सीलिंग:
मैग्ना कार्टा का मसौदा कैंटरबरी के
आर्कबिशप स्टीफन लैंगटन के नेतृत्व में सामंतों और पादरी के एक समूह द्वारा तैयार
किया गया था। 15 जून, 1215 को किंग जॉन
द्वारा रननीमेड में उन अभिजात्यवर्ग या सामंतों के दबाव में, जो उसके खिलाफ खुले
विद्रोह में थे, तैयार कर
इसे सील कर दिया गया था (हस्ताक्षर नहीं किया गया था, जैसा कि वर्णित
है)।
प्रमुख प्रावधान:
मैग्ना कार्टा में 63 खंड थे, जिनमें से कई उस
समय की शिकायतों के समाधान के लिए विशिष्ट थे। जिसमें से कुछ सबसे महत्वपूर्ण
प्रावधान जो शामिल हैं इस प्रकार थे:
१. चर्च के अधिकारों का संरक्षण.
२. मनमाना कर लगाने की राजा के क्षमता की
सीमा रेखा।
३. शीघ्र न्याय और निष्पक्ष सुनवाई की
गारंटी।
४. गैरकानूनी कारावास से सुरक्षा.
५. कराधान/टैक्स के लिए सहमति देने का
अभिजात्यवर्ग/सामंतों के अधिकार का प्रावधान।
६. चार्टर के प्रावधानों के कार्यान्वयन
की निगरानी के लिए 25 अभिजात्यवर्ग/सामंत की एक परिषद की
स्थापना।
परंपरा:
हालाँकि किंग जॉन ने शुरू में
मैग्नाकार्टा को रद्द करने की मांग की, लेकिन इसने
संवैधानिक सिद्धांतों और कानून के शासन के विकास की नींव रखी। मैग्नाकार्टा के मूल
विचार अंग्रेजी कानूनी और राजनीतिक संस्कृति में गहराई से शामिल हो गए और राजशाही
की शक्ति पर भविष्य की सीमाओं के लिए एक मिसाल कायम की।
पुष्टिकरण और विकास:
मैग्ना कार्टा में बाद के अंग्रेजी राजाओं
के शासनकाल के दौरान कई संशोधन और पुन: प्रकाशन हुए, विशेष रूप से 1216 और 1225 में राजा हेनरी के
शासनकाल के दौरान। इन पुष्टियों ने चार्टर के महत्व को मजबूत करने और इसे कानून के
शासन का एक स्थायी प्रतीक बनाने में मदद की।
कानूनी प्रणालियों पर प्रभाव:
मैग्नाकार्टा का अंग्रेजी कानूनी प्रणाली
के विकास पर और, विस्तार से, दुनिया भर की कई
कानूनी प्रणालियों पर गहरा प्रभाव पड़ा। इसने अमेरिकी संविधान और अधिकारों के
विधेयक के निर्माण को प्रभावित किया, जिसमें उचित
प्रक्रिया, आत्म-दोषारोपण के खिलाफ सुरक्षा और निष्पक्ष
सुनवाई के अधिकार जैसे सिद्धांतों पर जोर दिया गया।
आधुनिक प्रासंगिकता:
आज, मैग्नाकार्टा को
मानवाधिकारों के संघर्ष और सरकारी शक्ति की सीमा में एक प्रारंभिक मील के पत्थर के
रूप में देखा जाता है। हालाँकि इसके कई विशिष्ट खंड अब सीधे तौर पर लागू नहीं होते
हैं,
लेकिन कानून के
शासन,
न्याय और सरकारी
प्राधिकरण की सीमाओं के इसके सिद्धांतों का कानूनी और राजनीतिक चर्चा में सम्मान
और संदर्भ को शामिल किया जाता है।
आज भी मैग्ना कार्टा व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानून के शासन और
सरकारी सत्ता पर संवैधानिक सीमाओं की स्थायी खोज के प्रतीक के रूप में खड़ा है, जो इसे लोकतंत्र और
मानव अधिकारों के इतिहास में एक आधारशिला दस्तावेज बनाता है।
धन्यवाद
राजेश सिंह
Wednesday, February 26, 2025
हिन्दुवादिओं के शासन में कुचलकर मरता भारत
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पिछले शनिवार रात लगभग 9.30 बजे के दौरान, मची
भगदड़ में कम से कम 18 लोगों की जान चली गई, बताया जाता है कि मृतकों में 14 महिलाएं है, तथा 4 पुरुष, बच्चों का आकड़ा नहीं बताया गया है. हाँ 25 लोगों
के घायल होने की भी खबर है। ये सभी लोग नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर
प्रयागराज के लिए ट्रेन पकड़ने के हेतु खड़े थे। तभी वहां भगदड़ मच गई। भारत में
पिछले कुछ सालों में भगदड़ के कई मामले सामने आए हैं। एक महीने के अंदर ही भगदड़
के दो मामलें आ गए, जो कि प्रशासनिक व्यवस्था की नाकामी नतीजा है, लोगों का कहना है कि नई दिल्ली से ये लोग प्रयागराज महाकुम्भ मेले
में शामिल होने के लिए जा रहे थे. नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से भारी पैमाने पर अनअपेक्षित मौतें हो रही हैं, इन अनअपेक्षित मौतों की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है, नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा इन मौतों के प्रति उदासीनता गंभीर चिंता का विषय है।
"प्रयागराज महाकुंभ में जाने वाले निर्दोष लोग रेलवे के कुप्रबंधन
का शिकार हो गए। मोदी सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्थाओं को
ऐसा बना दिया है कि लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। ऐसा कोई दिन नहीं
है, जब रेलवे में किसी घटना की खबर न मिली हो। जब
सत्ता में बैठे लोग दुर्घटनाओं की सूचनाओं को छुपाने की कोशिश करते हैं तो भला
रेलवे की जवाबदेही और जिम्मेदारी कौन तय करेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली रेलवे
स्टेशन पर हुई भगदड़ में लोगों की मौत पर दु:ख जताते हुए कहा कि नई दिल्ली रेलवे
स्टेशन पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण भगदड़ से मैं बहुत दु:खी हूँ। मेरी
प्रार्थनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है।
पूरी टीम उन सभी लोगों की सहायता करने के लिए काम कर रही है जो इस दु:खद घटना से
प्रभावित हुए हैं। सच तो यह है कि रेल मंत्री जी आप बिलकुल दु:खी नहीं हैं क्योकि
आपकों तो कुंभ मेले से कमाई करनी थी 3000 स्पेशल ट्रेनों सहित 13000 ट्रेनें चलानी थी, जैसा की आपके ही स्टेटमेंट
को इकोनॉमिक्स टाईम्स ने अपने 8 दिसंबर
के एडिसन में छापा है जाहिर है आपके परिवार का रेलवे स्टेशन पर कोई कुचलकर नहीं
मरा है. सच कहें तो कोरम पूरा करने के लिए यह आपका राजनैतिक बयान है और आपके
मंत्रालय की कुव्यवस्था से हुई भगदड़ में मरे लोगों के परिजनों के प्रति अगर वाकई
आपके मन में तनिक भी दुःख है तो कैबिनेट और रेल मंत्रालय से इस्तीफा क्यों नहीं दे
देते? लेकिन इस महाकुम्भ मेगा इवेंट से डबल इंजिन
सरकार की मंशा देश की हिन्दू जनता से 3 लाख
करोड़ रूपये की उगाही करना है जिसमें रेलवे का भी हिस्सा है इसी लिए तो घटना के दिन
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से प्रति घंटे 1500 रेलवे
टिकिट बेचे गए बिना इस व्यवस्था के कि उन यात्रियों को प्रयागराज कैसे भेजा जाएगा? क्या यह रेलवे द्वारा महाकुम्भ की आड़ में शुद्ध मुनाफे की कयावद
नहीं थी.
अगर हम जानवरों के भी आवाजाही/परिवहन या ट्रांसपोटेशन की बात करें तो
उनके लिए भी भारत सरकार का पशुओं के परिवहन नियम 1978 अठहत्तर देश में मौजूद है. इन नियमों को पशुओं
के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1978 के नियम 47 से 56 का पालन करना अनिवार्य है इसका उल्लंघन बर्दास्त नहीं किया जा सकता
इस नियम के बारे में मुख्य रूप से 13 जुलाई 2015 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में कहा
गया है कि पशु परिवहन करने वाले व्यक्ति द्वारा ऐसे पशु के परिवहन से पहले यह
सत्यापित करते हुए प्रमाणपत्र प्राप्त किया जाएगा कि उक्त पशुओं से संबंधित सभी
प्रासंगिक केंद्रीय और राज्य अधिनियम नियम और आदेश ऐसे पशुओं के परिवहन से संबंधित नियमों का विधिवत अनुपालन
किया गया है और पशुओं को किसी कानून के प्रावधान के विपरीत परिवहन नहीं किया जा
रहा है ध्यान रहे कि पशुओं के परिवहन पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1978 के नियम 47 से 56 का पालन करना अनिवार्य है लेकिन देश में परिवहन से संबंधित सामान्य
नागरिकों के प्रति क्रूरता के निवारण के लिए कोई नियम या अधिनियम मौजूद नहीं है.
क्योकि अगर कोई ऐसा नियम या अधिनिय होता तो कानून के हाँथ सत्ताधारियों के गिरेबान
तक पहुँचते, किन्तु दुर्भाग्य वस ऐसा कोई कानून नहीं है जो
कि परिवहन से संबंधित सामान्य नागरिकों के प्रति क्रूरता का निवारण करता हो.
प्रयागराज स्थित महाकुम्भ में मौनी अमावस्या के
दिन भगदड़ और मौतें
29 जनवरी, 2025 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान
भगदड़ में 30 लोगों की जान चली गई। इसमें सैकड़ों लोग घायल भी हो गए। यह मौतों का
सरकारी आकड़ा है जबकि प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा बताया जाता है कि हजारों लोग
महाकुम्भ के मेले में कुचल कर मरे हैं हजारों घायल हैं जिनका इलाज आज भी चल रहा है, इतना ही नहीं महाकुम्भ मेले
में मची भगदड़ के पश्चात लगभग 15000 लोगों
के लापता होने की खबर है. महाकुंभ मेले में ये हादसा 29 जनवरी
के तड़के हुआ था, जब सभी लोग संगम नोज की तरफ नहाने के लिए जा रहे
थे। प्रशासन द्वारा भीड़ का कुप्रबंधन इस भगदड़ का मुख्य कारण रहा और इस मेगा
धार्मिक इवेंट में
वीआईपी संस्कृति के प्रभाव के कारण आम जनता की घोर उपेक्षा की गई, " वीआईपी के विशेष आवाजाही के लिए सड़कों को बंद किया गया, जिससे स्नानार्थी भक्तों के लिए अव्यवस्था पैदा हो गई ।"
जिसकी परिणति के रूप में हजारों लोग मारे गए, कहा जाता है कि महाकुम्भ में
भगदड़ से हुई मौतों का सही आकड़ा आज तक नहीं बताया गया
है.
महाकुंभ में हुई भगदड़ ने इस भव्य धार्मिक समागम
पर ग्रहण लगा दिया है, जिससे ऐसे बड़े आयोजनों में भीड़ नियंत्रण को
लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा हो गई हैं। जाँच जारी रहने के साथ ही, भविष्य के अवसरों के लिए बेहतर प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल
सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, इस
बात पर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में मृतकों का आकड़ा देख कर शक होता है।
इस बीच, पीड़ितों के परिवार अपने नुकसान पर शोक मना रहे
हैं, जबकि बचे हुए लोग इस साल के कुंभ मेले के सबसे
काले क्षणों में से एक को देखने के आघात से जूझ रहे हैं। ध्यान रहे कि अभी कुम्भ
मेले में मची भगदड़ में मरे लोगों की चिताएं ठंढी भी नहीं हुई होंगी की नई दिल्ली
रेलवे स्टेशन पर, महाकुम्भ यात्री हादसे के शिकार हो गए।
आइये सड़क पर कुचल कर, तथा दुर्घटनाओं में मरने वाले महाकुम्भ के श्रद्धालुओं पर तारीखवार
नजर डालते हैं-
15 फरवरी:
मेजा में प्रयागराज-मिर्जापुर हाईवे पर शुक्रवार देर रात हुए भीषण हादसे में 10 श्रद्धालुओं
की मौत। तथा 12 से अधिक घायल हुए।
14 फरवरी:
फिरोजाबाद में अलग-अलग हादसों में 3 की
मौत, एवं 24 घायल। आगरा के रहनकलां में
चालक को झपकी, बस डिवाइडर पर चढ़ी, 40 घायल।
13 फरवरी:
कुशीनगर में श्रद्धालुओं से भरे टेंपो को अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर, 4 की
मौत, 5 घायल।
12 फरवरी:
फतेहपुर में दिल्ली से महाकुंभ जाते समय बस डंपर में घुसी, 4 की मौत, 13 घायल। उसी दिन महाकुंभ से
विंध्याचल जाते समय मिर्जापुर में कार और स्कॉर्पियो भिड़ी, 3 की मौत, 5 घायल।
11 फरवरी:
महाकुंभ से दिल्ली आ रही दो डबल डेकर बसें आपस में भिड़ीं, 2 की मौत, 15 घायल। उसी दिन 11 फरवरी को प्रयागराज
के उतरांव में 3 श्रद्धालुओं
को अज्ञात वाहन ने रौंदा।
10 फरवरी:
फतेहपुर और सोनभद्र हादसों में 9 श्रद्धालुओं
की मौत, 20 घायल। 10 फरवरी को ही इटावा में महाकुंभ से जा रही बस की ट्रक से टक्कर, 2 की मौत, 20 से ज्यादा घायल। और 10 फरवरी को ही बांदा में श्रद्धालुओं से भरी ऑल्टो कार खड़े ट्रक से भिड़ी, 1 की मौत, चार गंभीर घायल ।
9 फरवरी:
बनारस-प्रयागराज हाइवे के उरई में दो श्रद्धालुओं की सड़क दुर्घटना में मौत, 9 फरवरी को ही सोनभद्र में बस दुर्घटना में 4 की
मौत, 7 घायल। और 9 फरवरी को ही हमीरपुर में ट्रैवलर हादसे में 3 की
मौत, 10 घायल।
8 फरवरी:
भदोही के औराई क्षेत्र में एक पंक्चर गाड़ी को ठीक करने के लिए रोड के किनारे खड़े श्रद्धालुओं को तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने कुचला, 2 की मौत, 9 घायल।
7 फरवरी:
यमुना एक्सप्रेस-वे पर टप्पल श्रद्धालुओं से भरी मिनी बस वॉल्वो में पीछे से टकराई, 2 की मौके पर मौत, 10 गंभीर घायल।
6 फरवरी:
वाराणसी, फतेहपुर, झांसी
में श्रद्धालुओं की गाड़ियां हादसे की शिकार हुईं, 5 मौतें, करीब 50 घायल।
घायलों में इटावा में दिल्ली से महाकुंभ जा रही बस की ट्रक से हुई टक्कर के 40 लोग
भी शामिल हैं।
5 फरवरी:
चंदौली में ट्रक ने खड़ी बस में टक्कर मारी, 2 की
मौत, पांच घायल।
4 फरवरी:
बिहार के श्रद्धालुओं की महाकुंभ
जाते समय चंदौली में ट्रैवलर पलटी, 2 मौत, 12 घायल।
3 फरवरी:
सोनभद्र में क्रेटा और ट्रेलर आमने-सामने भिड़े, 6 की मौत। कानपुर देहात के अकबरपुर में कुंभ स्नान करने जा रहा परिवार हादसे
का शिकार, 2 की मौत, 3 घायल।
2 फरवरी:
गोरखपुर में रोडवेज बस की ट्रक से टक्कर, 12 घायल, 5 की हालत गंभीर।
1 फरवरी:
मुजफ्फरपुर में श्रद्धालुओं से भरी स्कॉर्पियो अनियंत्रित, 5 की मौत, 4 घायल।
1 फरवरी से लेकर 15 फरवरी
तक कुल 69 उनहत्तर श्रद्धालुओं
की वाहनों की टक्कर और वाहनों के कुचलने से मौत हुई और 325 घायल हुए आपको जानकार आश्चर्य होगा कि ये सभी हादसे महाकुंभ के
श्रद्धालुओं से जुड़े हैं।
बीते बुधवार 8 जनवरी 2025 को दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश के सबसे अमीर
मंदिरों में से एक तिरुपति मंदिर में भगदड़ मचने से 6 लोगों की मौत हो गई थी। करीब 40 लोग
घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. यह घटना उस
समय हुई जब हजारों हिंदू श्रद्धालु मुफ्त दर्शन पास हासिल करने के लिए वहां एकत्र
हुए थे। बता
दें कि बुधवार की रात, तिरुमाला हिल्स पर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी
मंदिर में वैकुंठ द्वार दर्शनम के लिए टिकट लेने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग
भाग रहे थे, जिसके बाद तिरुपति में एमजीएम स्कूल के पास
बैरागी पट्टेदा में मची भगदड़ में आधिकारिक रूप से बताये गए छह श्रद्धालुओं की मौत
के अलावा लगभग 40 से अधिक घायल हो गए. 10 जनवरी से शुरू होने वाले 10 दिवसीय
वैकुंठ द्वार दर्शन के लिए देश भर से सैकड़ों भक्त वहां पहुंचे थे। यह हादसा तब
हुआ जब दर्शन के लिए टोकन लेने के दौरान लगभग 4000-5000 श्रद्धालु लाइन में खड़े थे. उसी समय वहां मौजूद
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया और भगदड़ मच गई।
हाथरस भगदड़ में 121 लोगों की हुई थी मौत-
हाथरस में भोले बाबा
के धार्मिक आयोजन में हुई भगदड़ महाकुम्भ और नई दिल्ली के भगदड़ की घटनाओं की तरह
बदइन्तजामी का परिणाम ही था उस समय दिल्ली से सिर्फ 146 किलोमीटर दूर यूपी के हाथरस से जो तस्वीरें आई
थी वो दिल को झकझोर देने वाली थी. 121 लोगों की जान जिस तरह से गई वो हमारे समाज की एक
बर्बर तस्वीर उजागर करती है. एक सभ्य समाज में जहां नियम कानून का शासन
है, जहां पढ़े लिखे
लोग रहते हों, ऐसा कैसे हो सकता है कि इतनी भीड़ इकट्ठी हो जाए और एक डॉक्टर तक की व्यवस्था न हो. करीब 2 से ढाई लाख की भीड़ इकट्ठा होती है और पुलिस और प्रशासन का कोई
बड़ा अफसर नहीं होता है. ऐसा कैसे हो सकता है कि एक शख्स खुद को भगवान घोषित कर दे
और लोग जान पर खेलकर उसके चरणों की धूल लेने का प्रयास करें। आखिर इस शर्मनाक घटना
का गुनहगार कौन था? इस घटना के लिए किसे दोषी ठहराया गया? हाथरस की घटना सैकड़ों सवालों से भरी हैं. इसमें दर्द है, पीड़ा है, बदइंतजामी है. इस हादसे के बारे में अगर बाबा
बागेश्वर धाम से पूछा गया होता तो वह कह देता की आस्थास्थान पर मरने वाले उन 121 लोगों को मोक्ष प्राप्त हो गया होगा।
केंद्र सरकार से यह
सवाल पूछा जाना चाहिए जब 2013 में ही इंटरनेशनल जर्नल ऑफ डिजास्टर रिस्क
रिडक्शन (आईजेडीआरआर) द्वारा प्रकाशित 2013
के एक अध्ययन में बता
दिया गया था कि भारत में होने वाली
79% उन्यासी प्रतिशत
भगदड़ का कारण धार्मिक आयोजन और तीर्थयात्राएं हैं। तो सरकार क्यों
नहीं चेती। ठीक है अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो नई दिल्ली के
"उपहार सिनेमा त्रासदी" जिसमें आग लगने से 59 उनसठ लोगों की मौत हो गई थी के मामले में सर्वोच्च
न्यायालय का आदेश जिसमें कहा गया था कि राज्य के कष्टकारी दायित्व से निपटने के
लिए एक व्यापक कानून की आवश्यकता है। उस कानून को अब तक क्यों नहीं बनाया गया? चिंताजनक बात यह है कि कोई भी सामूहिक समारोह आयोजित करने से पहले
किसी स्थान या संरचना की क्षमता का उचित मूल्यांकन क्यों नहीं किया जाता?. आखिर इस देश की जनता को बार-बार क्यों मरना होता है? कभी
सरकारी लालच, कभी बाबाओं के लालच और कभी पूंजीपतियों के लालच
की शिकार हो जाना क्या भारत की आम जनता की नियति बन चुकी है? आखिर इन मौतों का जवाबदेह कौन हैं? क्या देश में पूरब से लेकर
पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक पोष्टर, बैनर और होर्डिंग्स लगाकर 144 साल बाद लगे महाकुम्भ का झूठा प्रोपेगेंडा करके
और श्रद्धालु हिन्दुओं को उकसा कर, या
देशभक्ति का हवाला देकर बुलाने वालों के खिलाफ हजारों लोगों के गैर इरादतन हत्या
का मुकदद्मा क्यों नहीं चलाना चाहिए? सबसे
बड़ा सवाल यह है कि बिल्ली/ या यूं कहें कि जनता के खून के प्यासे बिल्लों के गले
में घंटी कौन बांधेगा ?
धन्यवाद
राजेश सिंह
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