Wednesday, February 26, 2025

हिन्दुवादिओं के शासन में कुचलकर मरता भारत

 

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर  पिछले शनिवार रात लगभग 9.30  बजे के दौरान, मची भगदड़ में कम से कम 18 लोगों की जान चली गईबताया जाता है कि मृतकों में 14 महिलाएं है,  तथा 4 पुरुषबच्चों का आकड़ा नहीं बताया गया है. हाँ  25 लोगों के घायल होने की भी खबर है। ये सभी लोग नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर प्रयागराज के लिए ट्रेन पकड़ने के हेतु खड़े थे। तभी वहां भगदड़ मच गई। भारत में पिछले कुछ सालों में भगदड़ के कई मामले सामने आए हैं। एक महीने के अंदर ही भगदड़ के दो मामलें आ गएजो कि प्रशासनिक व्यवस्था की नाकामी नतीजा हैलोगों का कहना है कि नई दिल्ली से ये लोग प्रयागराज महाकुम्भ मेले में शामिल होने के लिए जा रहे थे. नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से  भारी पैमाने पर अनअपेक्षित मौतें हो रही हैंइन अनअपेक्षित मौतों की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं  हैनरेंद्र मोदी सरकार द्वारा इन मौतों के प्रति उदासीनता  गंभीर चिंता का विषय है।

"प्रयागराज महाकुंभ में जाने वाले निर्दोष लोग रेलवे के कुप्रबंधन का शिकार हो गए। मोदी सरकार ने  सार्वजनिक व्यवस्थाओं को ऐसा बना दिया है कि लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। ऐसा कोई दिन नहीं हैजब रेलवे में किसी घटना की खबर न मिली हो। जब सत्ता में बैठे लोग दुर्घटनाओं की सूचनाओं को छुपाने की कोशिश करते हैं तो भला रेलवे की जवाबदेही और जिम्मेदारी कौन तय करेगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में लोगों की मौत पर दु:ख जताते हुए कहा कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण भगदड़ से मैं बहुत दु:खी हूँ। मेरी प्रार्थनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। पूरी टीम उन सभी लोगों की सहायता करने के लिए काम कर रही है जो इस दु:खद घटना से प्रभावित हुए हैं। सच तो यह है कि रेल मंत्री जी आप बिलकुल दु:खी नहीं हैं क्योकि आपकों तो कुंभ मेले से कमाई करनी थी 3000 स्पेशल ट्रेनों सहित 13000 ट्रेनें चलानी थी, जैसा की आपके ही स्टेटमेंट को इकोनॉमिक्स टाईम्स ने अपने 8 दिसंबर के एडिसन में छापा है जाहिर है आपके परिवार का रेलवे स्टेशन पर कोई कुचलकर नहीं मरा है. सच कहें तो कोरम पूरा करने के लिए यह आपका राजनैतिक बयान है और आपके मंत्रालय की कुव्यवस्था से हुई भगदड़ में मरे लोगों के परिजनों के प्रति अगर वाकई आपके मन में तनिक भी दुःख है तो कैबिनेट और रेल मंत्रालय से इस्तीफा क्यों नहीं दे देतेलेकिन इस महाकुम्भ मेगा इवेंट से डबल इंजिन सरकार की मंशा  देश की हिन्दू जनता से 3 लाख करोड़ रूपये की उगाही करना है जिसमें रेलवे का भी हिस्सा है इसी लिए तो घटना के दिन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से प्रति घंटे 1500 रेलवे टिकिट बेचे गए बिना इस व्यवस्था के कि उन यात्रियों को प्रयागराज कैसे भेजा जाएगाक्या यह रेलवे द्वारा महाकुम्भ की आड़ में शुद्ध मुनाफे की कयावद नहीं थी.

अगर हम जानवरों के  भी आवाजाही/परिवहन या ट्रांसपोटेशन की बात करें तो उनके लिए भी भारत सरकार का पशुओं के परिवहन नियम 1978  अठहत्तर देश में मौजूद है. इन नियमों को पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1978 के नियम 47 से 56 का पालन करना अनिवार्य है इसका उल्लंघन बर्दास्त नहीं किया जा सकता इस नियम के बारे में मुख्य रूप से 13 जुलाई 2015 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में कहा गया है कि पशु परिवहन करने वाले व्यक्ति द्वारा ऐसे पशु के परिवहन से पहले यह सत्यापित करते हुए प्रमाणपत्र प्राप्त किया जाएगा कि उक्त पशुओं से संबंधित सभी प्रासंगिक केंद्रीय और राज्य अधिनियम नियम और आदेश ऐसे पशुओं के परिवहन से संबंधित  नियमों का विधिवत अनुपालन किया गया है और पशुओं को किसी कानून के प्रावधान के विपरीत परिवहन नहीं किया जा रहा है ध्यान रहे कि पशुओं के परिवहन पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1978 के नियम 47 से 56 का पालन करना अनिवार्य है लेकिन देश में परिवहन से संबंधित सामान्य नागरिकों के प्रति क्रूरता के निवारण के लिए कोई नियम या अधिनियम मौजूद नहीं है. क्योकि अगर कोई ऐसा नियम या अधिनिय होता तो कानून के हाँथ सत्ताधारियों के गिरेबान तक पहुँचते, किन्तु दुर्भाग्य वस ऐसा कोई कानून नहीं है जो कि परिवहन से संबंधित सामान्य नागरिकों के प्रति क्रूरता का निवारण करता हो. 

प्रयागराज स्थित महाकुम्भ में मौनी अमावस्या के दिन भगदड़  और मौतें

29 जनवरी, 2025 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान भगदड़ में  30 लोगों की जान चली गई। इसमें सैकड़ों लोग घायल भी हो गए। यह मौतों का सरकारी आकड़ा है जबकि प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा बताया जाता है कि हजारों लोग महाकुम्भ के मेले में कुचल कर मरे हैं हजारों घायल हैं जिनका इलाज आज भी चल  रहा है, इतना ही नहीं महाकुम्भ मेले में मची भगदड़ के पश्चात लगभग 15000 लोगों के लापता होने की खबर है. महाकुंभ मेले में ये हादसा 29 जनवरी के तड़के हुआ थाजब सभी लोग संगम नोज की तरफ नहाने के लिए जा रहे थे। प्रशासन द्वारा भीड़ का कुप्रबंधन इस भगदड़ का मुख्य कारण रहा और इस मेगा धार्मिक इवेंट  में वीआईपी संस्कृति के प्रभाव के कारण आम जनता की घोर उपेक्षा की गई, " वीआईपी के विशेष आवाजाही के लिए सड़कों को बंद किया गयाजिससे स्नानार्थी भक्तों के लिए अव्यवस्था पैदा हो गई ।" जिसकी परिणति के रूप में हजारों लोग मारे गएकहा  जाता है कि महाकुम्भ में भगदड़  से हुई मौतों का सही आकड़ा आज तक नहीं बताया गया है. 

महाकुंभ में हुई भगदड़ ने इस भव्य धार्मिक समागम पर ग्रहण लगा दिया हैजिससे ऐसे बड़े आयोजनों में भीड़ नियंत्रण को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा हो गई हैं। जाँच जारी रहने के साथ हीभविष्य के अवसरों के लिए बेहतर प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा,  इस बात पर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में मृतकों का आकड़ा देख कर शक होता है। इस बीचपीड़ितों के परिवार अपने नुकसान पर शोक मना रहे हैंजबकि बचे हुए लोग इस साल के कुंभ मेले के सबसे काले क्षणों में से एक को देखने के आघात से जूझ रहे हैं। ध्यान रहे कि अभी कुम्भ मेले में मची भगदड़ में मरे लोगों की चिताएं ठंढी भी नहीं हुई होंगी की नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर, महाकुम्भ यात्री हादसे के शिकार हो गए।

आइये सड़क पर कुचल करतथा दुर्घटनाओं में मरने वाले महाकुम्भ के श्रद्धालुओं पर तारीखवार नजर डालते हैं-

15 फरवरी: मेजा में प्रयागराज-मिर्जापुर हाईवे पर शुक्रवार देर रात हुए भीषण हादसे में 10 श्रद्धालुओं की मौत। तथा 12 से अधिक घायल हुए।

14 फरवरी: फिरोजाबाद में अलग-अलग हादसों में 3 की मौतएवं 24 घायल। आगरा के रहनकलां में चालक को झपकीबस डिवाइडर पर चढ़ी, 40 घायल।

13 फरवरी: कुशीनगर में श्रद्धालुओं से भरे टेंपो को अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर, 4 की मौत, 5 घायल।

12 फरवरी: फतेहपुर में दिल्ली से महाकुंभ जाते समय बस डंपर में घुसी, 4 की मौत, 13 घायल। उसी दिन महाकुंभ से विंध्याचल जाते समय मिर्जापुर में कार और स्कॉर्पियो भिड़ी, 3 की मौत, 5 घायल।

11 फरवरी: महाकुंभ से दिल्ली आ रही दो डबल डेकर बसें आपस में भिड़ीं, 2 की मौत, 15 घायल। उसी दिन 11 फरवरी  को प्रयागराज के उतरांव में 3 श्रद्धालुओं को अज्ञात वाहन ने रौंदा।

10 फरवरी: फतेहपुर और सोनभद्र हादसों में 9 श्रद्धालुओं की मौत, 20 घायल। 10 फरवरी  को ही इटावा में महाकुंभ से जा रही बस की ट्रक से टक्कर, 2 की मौत, 20 से ज्यादा घायल। और 10 फरवरी  को ही बांदा में श्रद्धालुओं से भरी ऑल्टो कार खड़े ट्रक से भिड़ी, 1 की मौतचार गंभीर घायल ।

9 फरवरी: बनारस-प्रयागराज हाइवे के उरई में दो श्रद्धालुओं की सड़क दुर्घटना में मौत, 9 फरवरी  को ही सोनभद्र में बस दुर्घटना में 4 की मौत, 7 घायल। और 9 फरवरी  को ही हमीरपुर में ट्रैवलर हादसे में 3 की मौत, 10 घायल।

8 फरवरी: भदोही के औराई क्षेत्र में एक पंक्चर गाड़ी को ठीक करने के लिए रोड  के किनारे खड़े श्रद्धालुओं को तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने कुचला, 2 की मौत, 9 घायल।

7 फरवरी: यमुना एक्सप्रेस-वे पर टप्पल श्रद्धालुओं से भरी मिनी बस वॉल्वो में पीछे से टकराई, 2 की मौके पर मौत, 10 गंभीर घायल।

6 फरवरी: वाराणसीफतेहपुरझांसी में श्रद्धालुओं की गाड़ियां हादसे की शिकार हुईं, 5 मौतेंकरीब 50 घायल। घायलों में इटावा में दिल्ली से महाकुंभ जा रही बस की ट्रक से हुई टक्कर के 40 लोग भी शामिल हैं।

5 फरवरी: चंदौली में ट्रक ने खड़ी बस में टक्कर मारी, 2 की मौतपांच घायल।

4 फरवरी: बिहार के  श्रद्धालुओं की  महाकुंभ जाते समय चंदौली में ट्रैवलर पलटी, 2 मौत, 12 घायल।

3 फरवरी: सोनभद्र में क्रेटा और ट्रेलर आमने-सामने भिड़े, 6 की मौत। कानपुर देहात के अकबरपुर में कुंभ स्नान करने जा रहा परिवार हादसे का शिकार, 2 की मौत, 3 घायल।

2 फरवरी: गोरखपुर में रोडवेज बस की ट्रक से टक्कर, 12 घायल, 5 की हालत गंभीर।

1 फरवरी: मुजफ्फरपुर में श्रद्धालुओं से भरी स्कॉर्पियो अनियंत्रित, 5 की मौत, 4 घायल।

फरवरी से लेकर 15 फरवरी तक कुल 69 उनहत्तर श्रद्धालुओं की वाहनों की टक्कर और वाहनों के कुचलने से मौत हुई और 325 घायल हुए आपको जानकार आश्चर्य होगा कि ये सभी हादसे महाकुंभ के श्रद्धालुओं से जुड़े हैं।

बीते बुधवार जनवरी 2025 को दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक तिरुपति मंदिर में भगदड़ मचने से लोगों की मौत हो गई थी। करीब 40 लोग घायल हुए हैंजिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. यह घटना उस समय हुई जब हजारों हिंदू श्रद्धालु मुफ्त दर्शन पास हासिल करने के लिए वहां एकत्र हुए थे।  बता दें कि बुधवार की राततिरुमाला हिल्स पर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में वैकुंठ द्वार दर्शनम के लिए टिकट लेने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग भाग रहे थेजिसके बाद तिरुपति में एमजीएम स्कूल के पास बैरागी पट्टेदा में मची भगदड़ में आधिकारिक रूप से बताये गए छह श्रद्धालुओं की मौत के अलावा लगभग 40 से अधिक घायल हो गए. 10 जनवरी से शुरू होने वाले 10 दिवसीय वैकुंठ द्वार दर्शन के लिए देश भर से सैकड़ों भक्त वहां पहुंचे थे। यह हादसा तब हुआ जब दर्शन के लिए टोकन लेने के दौरान लगभग 4000-5000 श्रद्धालु लाइन में खड़े थे. उसी समय वहां मौजूद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया और भगदड़ मच गई।

हाथरस भगदड़ में 121 लोगों की हुई थी मौत-

हाथरस में भोले बाबा के धार्मिक आयोजन में हुई भगदड़ महाकुम्भ और नई दिल्ली के भगदड़ की घटनाओं की तरह बदइन्तजामी का परिणाम ही था उस समय दिल्ली से सिर्फ 146 किलोमीटर दूर यूपी के हाथरस से जो तस्वीरें आई थी वो दिल को झकझोर देने वाली थी. 121 लोगों की जान जिस तरह से गई वो हमारे समाज की एक बर्बर तस्वीर उजागर करती है. एक सभ्य समाज में जहां नियम कानून का शासन हैजहां पढ़े लिखे लोग रहते होंऐसा कैसे हो सकता है कि इतनी भीड़ इकट्ठी हो जाए और एक डॉक्टर तक की व्यवस्था न  हो. करीब से ढाई लाख की भीड़ इकट्ठा होती है और पुलिस और प्रशासन का कोई बड़ा अफसर नहीं होता है. ऐसा कैसे हो सकता है कि एक शख्स खुद को भगवान घोषित कर दे और लोग जान पर खेलकर उसके चरणों की धूल लेने का प्रयास करें। आखिर इस शर्मनाक घटना का गुनहगार कौन था?  इस घटना के लिए किसे दोषी ठहराया गया?  हाथरस की घटना सैकड़ों सवालों से भरी हैं. इसमें दर्द हैपीड़ा हैबदइंतजामी है. इस हादसे के बारे में अगर बाबा बागेश्वर धाम से पूछा गया होता तो वह कह देता की आस्थास्थान पर मरने वाले उन 121 लोगों को मोक्ष प्राप्त हो गया होगा।

केंद्र सरकार से यह सवाल पूछा जाना चाहिए जब 2013 में ही इंटरनेशनल जर्नल ऑफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (आईजेडीआरआर) द्वारा प्रकाशित 2013 के एक अध्ययन में बता दिया गया था कि भारत में होने वाली 79% उन्यासी प्रतिशत

 भगदड़ का कारण धार्मिक आयोजन और तीर्थयात्राएं हैं। तो सरकार क्यों नहीं चेती। ठीक है अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो नई दिल्ली के "उपहार सिनेमा त्रासदी" जिसमें आग लगने से 59  उनसठ  लोगों की मौत हो गई थी के मामले में सर्वोच्च न्यायालय का आदेश जिसमें कहा गया था कि राज्य के कष्टकारी दायित्व से निपटने के लिए एक व्यापक कानून की आवश्यकता है। उस कानून को अब तक क्यों नहीं बनाया गया?  चिंताजनक बात यह है कि कोई भी सामूहिक समारोह आयोजित करने से पहले किसी स्थान या संरचना की क्षमता का उचित मूल्यांकन क्यों नहीं किया जाता?.  आखिर इस देश की जनता को बार-बार क्यों मरना होता है? कभी सरकारी लालचकभी बाबाओं के लालच और कभी पूंजीपतियों के लालच की शिकार हो जाना क्या भारत की आम जनता की नियति बन चुकी हैआखिर इन मौतों का जवाबदेह कौन हैंक्या  देश में पूरब से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक पोष्टरबैनर और होर्डिंग्स लगाकर 144 साल बाद लगे महाकुम्भ का झूठा प्रोपेगेंडा करके और श्रद्धालु हिन्दुओं को उकसा करया देशभक्ति का हवाला देकर बुलाने वालों के खिलाफ हजारों लोगों के गैर इरादतन हत्या का मुकदद्मा क्यों नहीं चलाना चाहिएसबसे बड़ा सवाल यह है कि बिल्ली/ या यूं कहें कि जनता के खून के प्यासे बिल्लों के गले में घंटी कौन बांधेगा ?

धन्यवाद

राजेश सिंह

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