भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित मानवाधिकारों पर दूसरा छह दिवसीय ITEC कार्यकारी क्षमता निर्माण कार्यक्रम हाल ही में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में ग्लोबल साऊथ के 11 राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों (NHRI) के 35 वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मानवाधिकार मुद्दों के बारे में उनकी समझ को बढ़ाना था।
कार्यक्रम का विवरण
यह कार्यक्रम 3 मार्च, 2025 से शुरू हुआ और इसमें मेडागास्कर, युगांडा, तिमोर लेस्ते, डीआर कांगो, टोगो, माली, नाइजीरिया, मिस्र, तंजानिया, बुरुंडी और तुर्कमेनिस्तान के NHRI के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने NHRC के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम, नीति आयोग के सदस्य श्री वी. के. पॉल और भारत के सबसे विवादस्पद पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार सहित प्रमुख वक्ताओं के नेतृत्व में संवादात्मक सत्रों में भाग लिया। सत्रों में नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ भारत में सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों सहित कई विषयों को शामिल किया गया।
राजीव कुमार की विवादस्पद उपस्थिति
इस कार्यक्रम में सबसे विवादस्पद क्षण पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार की उपस्थिति थी। राजीव कुमार का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है, और उन पर कई गंभीर आरोप लगे हैं, जिनमें शामिल हैं:
- सत्तापक्ष के प्रति झुकाव: उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सत्तापक्ष के अनुसांगिक संगठन के रूप में काम किया और विपक्ष की शिकायतों को नजरअंदाज किया।
- मतदाता सूची में हेरफेर: महाराष्ट्र और दिल्ली के विधानसभा चुनावों में मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप लगे।
- ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी: 2018 में महाराष्ट्र के भंडारा-गोंदिया उपचुनाव के दौरान, एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने गुजरात के सूरत से ईवीएम लाए जाने पर चिंता जताई थी।
इन आरोपों के बावजूद, राजीव कुमार को मानवाधिकारों के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। उनकी उपस्थिति ने कई सवाल उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- क्या NHRC ने राजीव कुमार के विवादस्पद रिकॉर्ड को नजरअंदाज किया?
- क्या राजीव कुमार की उपस्थिति से NHRC की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठते?
- क्या यह मानवाधिकारों के लिए एक झटका नहीं है कि एक विवादस्पद व्यक्ति को इस तरह के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया?
NHRC की प्रतिक्रिया
NHRC ने अभी तक राजीव कुमार की उपस्थिति पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, कुछ अधिकारियों ने निजी तौर पर कहा है कि राजीव कुमार को उनके अनुभव और ज्ञान के लिए आमंत्रित किया गया था।
विवाद का प्रभाव
राजीव कुमार की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को विवादों में डाल दिया है। कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने NHRC की आलोचना की है। उन्होंने NHRC पर राजीव कुमार को आमंत्रित करके अपनी विश्वसनीयता को खतरे में डालने का आरोप लगाया है।
निष्कर्ष
राजेश सिंह

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