Tuesday, April 1, 2025

न्याय में देरी, मानवाधिकार संकट और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों की चेतावनी

"सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी एन श्रीकृष्ण ने भारत में 5 करोड़ लंबित मामलों और मानवाधिकारों के गहरे संकट पर चिंता जताई। जानिए न्यायिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर क्यों मंडरा रहा है खतरा।"

"न्याय में देरी, न्याय से इनकार है।" यह चेतावनी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी एन श्रीकृष्ण ने एक राष्ट्रीय सम्मेलन में दी। उन्होंने देश में 5 करोड़ से अधिक लंबित मामलों को मानवाधिकारों के "गहरे संकट" का कारण बताया। साथ ही, उन्होंने न्यायिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बढ़ते दबाव को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।

लोकतांत्रिक अधिकारों और धर्मनिरपेक्षता पर सम्मेलन में श्रीकृष्ण ने कहा कि भारत में धर्मनिरपेक्षता और कानून का शासन दोनों संकट में हैं। "असहमति लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन आज यह अधिकार सिमट रहा है," उन्होंने जोर देकर कहा। पिछले एक दशक से न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव और अभिव्यक्ति पर प्रतिबंधों को उन्होंने गंभीर चुनौती बताया।

पूर्व जज ए के पटनायक ने हिरासत में मौतों और फर्जी मुठभेड़ों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "जिन संस्थाओं को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करनी थी, वे ही उनका सबसे ज़्यादा उल्लंघन कर रही हैं।" उन्होंने समाज में बढ़ती असमानता और धन के केंद्रीकरण को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सत्ता के दुरुपयोग पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग और CAG जैसी संस्थाएं सरकार के "एजेंट" बन गई हैं। "UAPA और NSA जैसे कानूनों का इस्तेमाल विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है," भूषण ने आरोप लगाया। उन्होंने लोगों से डर छोड़कर अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने का आह्वान किया।

सम्मेलन में पेश आंकड़े चौंकाने वाले हैं:

* देशभर की अदालतों में 5.5 करोड़ मामले लंबित।

* जेलों में 77% कैदी बिना सुनवाई के बंद हैं।

* 2022 में हिरासत में 1,882 मौतें दर्ज की गईं।

* 2021 में 31,677 बलात्कार के मामले सामने आए।

मणिपुर हिंसा को उदाहरण देते हुए बताया गया कि 175 लोगों की मौत और 60,000 लोगों के विस्थापन के बावजूद न्याय की प्रक्रिया धीमी है। संयुक्त राष्ट्र के मानव स्वतंत्रता सूचकांक 2023 में भारत 109वें स्थान पर है, जो 2015 के मुकाबले 9% गिरावट दर्शाता है।

सम्मेलन ने दो प्रस्ताव पारित किए:

1. मानवाधिकार आंदोलन को मज़बूत करने के लिए नागरिकों और बुद्धिजीवियों का गठजोड़ बनाना।

2. फिलिस्तीन में मानवाधिकार हनन के विरोध में वैश्विक एकजुटता दिखाना।

सीपीडीआरएस (CPDRS) के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि इसकी स्थापना न्यायमूर्ति वी आर कृष्ण अय्यर और पत्रकार कुलदीप नैयर ने की थी। संगठन का उद्देश्य धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाना है।

न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण के शब्दों में, "लोकतंत्र तभी जीवित रह सकता है जब हर नागरिक को बराबरी का हक़ मिले।" हालाँकि, न्यायिक देरी, दमनकारी कानून और संस्थाओं के पक्षपातपूर्ण रवैये के चलते यह लक्ष्य अभी दूर है। जैसा कि सम्मेलन में कहा गया, "न्याय की उम्मीद ही लोकतंत्र की नींव है।

धन्यवाद 

राजेश सिंह 

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