यूएससीआईआरएफ की चौंकाने वाली सिफारिशें
संयुक्त राज्य अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) पर प्रतिबंध लगाने और अमेरिकी हथियारों की बिक्री की समीक्षा करने की सिफारिश की है। यह कदम भारत में बढ़ते अल्पसंख्यक विरोधी हिंसा, धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दमनात्मक कार्रवाइयों को लेकर उठाया गया है। USCIRF ने भारत को लगातार छठे वर्ष 'विशेष चिंता वाले देश' (CPC) की सूची में शामिल करने की भी अनुशंसा की है।
2025 की रिपोर्ट में क्या है खास?
USCIRF की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों (मुसलमान, ईसाई, सिख) के खिलाफ हिंसा और भेदभावपूर्ण नीतियों में बढ़ोतरी हुई है। 2024 के आम चुनावों के दौरान भाजपा नेताओं द्वारा अल्पसंख्यक-विरोधी बयानबाजी, मस्जिदों का विध्वंस और गौरक्षकों द्वारा हमले प्रमुख चिंताएं हैं। रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया कि सरकार ने संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता को कमजोर करते हुए भारत को एक "हिंदू राष्ट्र" बनाने की कोशिश की है।
मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया गया है। USCIRF के अनुसार, पिछले एक दशक में नागरिकता संशोधन कानून (CAA), गौरक्षा समितियों को प्रोत्साहन और धार्मिक स्थलों के विध्वंस जैसे कदमों ने सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दिया है। 2023 में, ओपन डोर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ईसाइयों के खिलाफ हिंसा के 687 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40% अधिक हैं।
अंतरराष्ट्रीय दमन की नई रणनीति
रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारत सरकार ने विदेशों में रहने वाले सिख और मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। उदाहरण के लिए, कनाडा और अमेरिका में सिख कार्यकर्ताओं पर रॉ की निगरानी और धमकियों के आरोप लगे हैं। USCIRF ने अमेरिकी कांग्रेस से 2024 का 'अंतरराष्ट्रीय दमन रिपोर्टिंग अधिनियम' पारित करने की अपील की है, जो ऐसी कार्रवाइयों की निगरानी करेगा।
आईएएमसी का दबाव और अमेरिकी प्रतिक्रिया
भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद (IAMC) ने USCIRF की सिफारिशों का समर्थन करते हुए अमेरिका से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। IAMC के कार्यकारी निदेशक रशीद अहमद के अनुसार, "मोदी सरकार का दमन केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी नागरिकों को भी प्रभावित कर रहा है।" हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए USCIRF को "पूर्वाग्रही और अवैज्ञानिक" बताया है।
भारत के लिए क्या हैं निहितार्थ?
यदि अमेरिका USCIRF की सिफारिशों को मानता है, तो भारत-अमेरिका रक्षा समझौतों (जैसे 2023 का GE-414 जेट इंजन डील) पर प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, CPC का टैग लगने से भारत की वैश्विक छवि को झटका लगेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत को आंतरिक मानवाधिकार सुधारों के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाएगा।
निष्कर्ष: सुधार की अपील के साथ चुनौतियां
USCIRF की रिपोर्ट भारत के लिए एक चेतावनी है। धार्मिक सद्भाव बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीकरण के लिए सरकार को अल्पसंख्यक सुरक्षा और न्यायिक पारदर्शिता पर काम करना होगा। साथ ही, विदेश नीति में नरमी और अमेरिका जैसे सहयोगियों के साथ रचनात्मक संवाद की आवश्यकता है।
राजेश सिंह

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