Friday, April 4, 2025

UNHRC-58 में भारत ने लैंगिक समानता की वैश्विक मिसाल कायम की


जिनेवा, 2 अप्रैल 2025: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC-58) के 58वें सत्र के दौरान आयोजित एक साइड इवेंट में भारत ने लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की प्रगति को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया। राजस्थान समग्र कल्याण संस्थान (RSKS इंडिया) द्वारा आयोजित "ब्रेकिंग बैरियर: एडवांसिंग जेंडर इक्विटी एंड एम्पावरमेंट वीमेन इन इंडिया" कार्यक्रम में देश की नीतियों, योजनाओं और सामाजिक बदलाव की प्रेरक कहानियों को साझा किया गया।

शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता: महिला सशक्तिकरण की नींव

RSKS इंडिया के CEO एस.एन. शर्मा ने बताया कि "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" और "मुद्रा योजना" जैसे कार्यक्रमों ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में महिलाओं को शिक्षा व रोजगार से जोड़ा है। 2024 के आँकड़ों के अनुसार, मुद्रा योजना से 40% लाभार्थी महिलाएँ हैं, जिन्होंने सूक्ष्म उद्यम शुरू किए। वहीं, पंचायती राज संस्थाओं में 33% आरक्षण के कारण 14 लाख से अधिक महिलाएँ स्थानीय नेतृत्व की भूमिका में हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति: आयुष्मान भारत और आशा कार्यकर्ताओं का योगदान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ फैजा रिफात ने आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान बताया। 2025 तक, 80% ग्रामीण महिलाएँ नियमित स्वास्थ्य जाँच से जुड़ चुकी हैं। आशा कार्यकर्ताओं के प्रयासों से मातृ मृत्यु दर में 30% की गिरावट दर्ज की गई है।

कृषि क्षेत्र में महिलाओं का नेतृत्व: एफपीओ और तकनीकी प्रगति

इंडिया वाटर फाउंडेशन के अरविंद कुमार ने बताया कि महिला-नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठन (FPO) देश के 50% कृषि उत्पादन में योगदान दे रहे हैं। सरकार ने 2023 में "महिला किसान सशक्तिकरण योजना" शुरू की, जिसके तहत 10,000 एफपीओ को तकनीकी व वित्तीय सहायता दी जा रही है।

एसटीईएम शिक्षा में बढ़ती भागीदारी: नई शिक्षा नीति का प्रभाव

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और इंस्पायर कार्यक्रमों ने महिलाओं को विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ाया है। 2024 में, IITs और NITs में महिला छात्रों का नामांकन 25% से बढ़कर 35% हुआ है। पूनम शर्मा ने बताया कि 50% से अधिक स्टार्टअप्स में महिलाएँ संस्थापक या सह-संस्थापक हैं।

जम्मू-कश्मीर में लैंगिक न्याय: प्रगति और चुनौतियाँ

असमा शोरा ने जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी (35% पंचायत सदस्य) और शिक्षा दर (75%) को सराहा। हालाँकि, मानवाधिकार कार्यकर्ता जावेद अहमद बेग ने POJK और गिलगित-बाल्टिस्तान में महिलाओं के अधिकारों के हनन पर चिंता जताई। उन्होंने UN से इन क्षेत्रों में हस्तक्षेप की माँग की।

जल संरक्षण और पर्यावरण: महिलाओं की अग्रणी भूमिका

जल प्रबंधन विशेषज्ञ श्वेता त्यागी ने जल जीवन मिशन के तहत 12 करोड़ घरों में नल कनेक्शन पहुँचाने में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया। 2025 तक, 60% जल समितियों का नेतृत्व महिलाएँ कर रही हैं, जो जल संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा दे रही हैं।

भविष्य की राह: वैश्विक सहयोग और सतत प्रयास

कार्यक्रम के समापन में पर्यावरणविद् साई संपत ने लैंगिक समानता के लिए वैश्विक साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने SDG-5 (लैंगिक समानता) के लक्ष्यों को 2030 तक पूरा करने में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। अतिरिक्त जानकारी के अनुसार, भारत 2025-30 के लिए "महिला उद्यमिता परिषद" बनाने की योजना पर काम कर रहा है, जो 5 लाख महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देगी।

इस प्रकार, UNHRC-58 में भारत ने न केवल अपनी उपलब्धियों को प्रदर्शित किया, बल्कि वैश्विक समुदाय को लैंगिक न्याय के लिए एकजुट होने का संदेश भी दिया।

राजेश सिंह


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